आरबीआई गवर्नर ने महंगाई और कमज़ोर मानसून को लेकर जताई सतर्कता
रिज़र्व बैंक ने मौजूदा उपभोक्ता महंगाई दर और मानसून से जुड़े जोखिमों का हवाला देते हुए ब्याज दरों में राहत की गुंजाइश सीमित बताई है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर ने हाल ही में देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर सतर्क रुख अपनाया है। उन्होंने बढ़ी हुई उपभोक्ता महंगाई दर और कमज़ोर मानसून से जुड़े जोखिमों को अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख चुनौती बताया है।
गवर्नर के अनुसार, इन कारणों से केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दरों में तत्काल राहत देने की गुंजाइश सीमित है। इसका मतलब है कि आम जनता और उद्योग जगत को फिलहाल ब्याज दरों में बड़ी राहत की उम्मीद कम ही करनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार 2026 के लिए कोर महंगाई दर को संशोधित कर 1.5 से 2.5 प्रतिशत के दायरे में रखा गया है, जो मौद्रिक नीति से जुड़े आगे के फैसलों में अहम भूमिका निभाएगा।
इस बीच घरेलू शेयर बाज़ार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निफ्टी 50 सूचकांक हाल के दिनों में ज़्यादातर सीमित दायरे में ही कारोबार करता दिखा है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
बाज़ार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में निवेशकों की नज़र मानसून की चाल, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक रुझानों पर बनी रहेगी, जो घरेलू बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।



