तमिलनाडु में विजय की टीवीके सरकार, 1967 के बाद पहली गैर-द्रविड़ पार्टी सत्ता में
अभिनेता से नेता बने विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, टीवीके गठबंधन को विधानसभा चुनाव में बहुमत मिला।
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। पार्टी ने अकेले 108 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी दलों को साथ लेकर बने गठबंधन को कुल मिलाकर 121 सीटें हासिल हुईं, जो सरकार बनाने के लिए ज़रूरी बहुमत से अधिक थीं।
10 मई को राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित समारोह में विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। उनके साथ शुरुआत में नौ अन्य मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली।
यह पहला मौका है जब वर्ष 1967 के बाद तमिलनाडु में किसी गैर-द्रविड़ पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार बनी है। इससे पहले राज्य की सत्ता पर लंबे समय तक द्रमुक और अन्नाद्रमुक का बारी-बारी से नियंत्रण रहा था, जिसके चलते इस नतीजे को राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
टीवीके के गठबंधन में कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग शामिल हैं। मंत्रिमंडल का विस्तार चरणों में हुआ - 21 मई को 23 और मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें कांग्रेस के दो सदस्य भी शामिल थे, जबकि अगले दिन दो और सहयोगी दलों के मंत्रियों ने शपथ ली। इस तरह मंत्रिपरिषद में अंतत: कुल 35 सदस्य हो गए।
विपक्ष में रहे द्रमुक के नेता उदयनिधि स्टालिन को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका मिली। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह नतीजा तमिलनाडु की राजनीति में दशकों से चले आ रहे द्रविड़ पार्टियों के दबदबे को चुनौती देने वाला माना जा रहा है, हालांकि नई सरकार के सामने प्रशासनिक अनुभव की कमी को पाटने की चुनौती भी बताई जा रही है।