पड़ोसी देश नेपाल में भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़: संकट की घड़ी में भारत ने बढ़ाई मानवीय सहायता
नेपाल में मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भारत सरकार ने मित्र देश के लिए राहत और बचाव सामग्री की बड़ी खेप रवाना की है।

नेपाल में भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़ का कहर: संकट की इस घड़ी में भारत ने बढ़ाई मानवीय सहायता, राहत सामग्री की खेप रवाना
नई दिल्ली / काठमांडू:
भारत के पड़ोसी देश नेपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। नदियों के उफान पर होने और जगह-जगह हुए भूस्खलन (Landslides) के कारण नेपाल के कई जिलों में स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। बुनियादी ढांचे को पहुंचे बड़े नुकसान और हजारों लोगों के प्रभावित होने के बाद, भारत सरकार ने पड़ोसी प्रथम (Neighbourhood First) नीति के तहत तत्काल मानवीय सहायता और राहत सामग्री नेपाल भेजने का फैसला किया है।
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही
नेपाल के काठमांडू घाटी, कोशी प्रांत और मध्य नेपाल के कई इलाकों में पिछले कुछ दिनों से जारी आफत की बारिश ने भारी तबाही मचाई है।
जनजीवन अस्त-व्यस्त: दर्जनों सड़कें और पुल बह जाने के कारण कई मुख्य राजमार्ग पूरी तरह ठप हो चुके हैं, जिससे दूरदराज के इलाकों का संपर्क राजधानी से टूट गया है।
विस्थापन और नुकसान: बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में घुसने से हजारों परिवार बेघर हो गए हैं। कई क्षेत्रों में बिजली, पेयजल और संचार सेवाएं पूरी तरह बाधित हो चुकी हैं।
भूस्खलन का खतरा: पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण राहत और बचाव कार्य में लगी नेपाली सेना और पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
भारत ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए बढ़ाई मदद
संकट के इस मोड़ पर भारत ने एक सच्चे और भरोसेमंद मित्र की भूमिका निभाते हुए आपातकालीन सहायता प्रदान की है। विदेश मंत्रालय (MEA) और भारतीय सशस्त्र बलों के समन्वय से राहत सामग्री की पहली बड़ी खेप नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों के लिए रवाना कर दी गई है।
राहत सामग्री में शामिल प्रमुख वस्तुएं:
आपातकालीन खाद्य सामग्री: सूखा राशन, पीने का शुद्ध पानी, शिशु आहार और खाने के रेडी-टू-ईट पैकेट।
चिकित्सा सहायता: जीवनरक्षक दवाएं, फर्स्ट-एड किट्स, वाटर प्यूरीफिकेशन टैबलेट्स और महामारी से बचाव के टीके।
अस्थायी आश्रय सामग्री: तिरपाल, तंबू (Tents), कंबल, स्लीपिंग बैग्स और सोलर लैंप।
बचाव उपकरण: बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष बोट्स और लाइफ जैकेट्स।
विदेश मंत्रालय और पीएमओ की निगरानी
भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया कि "भारत नेपाल के लोगों के साथ इस कठिन समय में मजबूती से खड़ा है। हम नेपाल सरकार की आवश्यकताओं के अनुसार आगे भी हर संभव सहायता, तकनीकी सहायता और बचाव उपकरण प्रदान करने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं।"
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास वहां के स्थानीय प्रशासन और नेपाल आपदा प्रबंधन अधिकारियों के संपर्क में है, ताकि राहत सामग्री को बिना किसी देरी के सीधे प्रभावित लोगों तक पहुँचाया जा सके।
द्विपक्षीय संबंधों और मानवीय एकजुटता का प्रतीक
नेपाल में जब भी प्राकृतिक आपदा आई है, भारत ने हमेशा सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया है। चाहे 2015 का विनाशकारी भूकंप हो या मानसून के दौरान आने वाली वार्षिक बाढ़, दोनों देशों के बीच का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ता संकट के समय में और गहरा होता दिख रहा है।
नेपाली अधिकारियों ने भारत द्वारा समय पर भेजी जा रही इस सहायता के लिए आभार व्यक्त किया है। आपदा प्रबंधन टीमों का कहना है कि भारत से मिली राहत सामग्री से विस्थापित परिवारों को त्वरित राहत मिलेगी और बीमारी फैलने के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी।




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