भारतीय वायुसेना जोधपुर में करेगी 'तरंग शक्ति-26' युद्ध अभ्यास: 40 देशों की सेनाएं होंगी शामिल
बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास 'तरंग शक्ति-26' का आयोजन जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर किया जा रहा है; भारत की वायु शक्ति और वैश्विक रक्षा सहयोग को मिलेगी नई ऊंचाइयां।

भारतीय वायुसेना जोधपुर में करेगी 'तरंग शक्ति-26' युद्ध अभ्यास: आसमान में दिखेगा भारत का पराक्रम और वैश्विक रणनीतिक शक्ति

जोधपुर (राजस्थान): भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी सामरिक क्षमताओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक नए शिखर पर ले जाने के लिए तैयार है। राजस्थान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर बहुराष्ट्रीय वायु सैन्य अभ्यास 'तरंग शक्ति-26' (Tarang Shakti-26) का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह भारतीय धरती पर आयोजित होने वाले अब तक के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यासों में से एक है।
इस विशाल सैन्य अभ्यास में दुनिया की प्रमुख वायुसेनाएं, जिनमें अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और मित्र देश शामिल हैं, अपने अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और सैन्य उपकरणों के साथ भाग ले रही हैं। लगभग 40 देशों की भागीदारी के साथ आयोजित हो रहा यह युद्ध अभ्यास न केवल भारत की वायु रक्षा क्षमता को प्रदर्शित करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर सैन्य सहयोग, अंतर-संचालनीयता (Interoperability) और सामरिक रणनीतियों के आदान-प्रदान का एक बड़ा मंच साबित होगा।
जोधपुर एयरबेस ही क्यों चुना गया?
जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन भारतीय वायुसेना के सबसे रणनीतिक और महत्वपूर्ण एयरबेस में से एक है। थार रेगिस्तान के समीप स्थित होने के कारण यह पश्चिमी सीमा की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विशाल हवाई क्षेत्र: जोधपुर के आसपास का विस्तृत और बिना किसी बाधा वाला हवाई क्षेत्र फाइटर जेट्स के जटिल और बड़े पैमाने के हवाई पैंतरेबाज़ी (Dogfights और Air Manoeuvres) के लिए पूरी तरह अनुकूल है।
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: इस एयरबेस पर सुखोई-30 एमकेआई (Su-30 MKI), राफेल और अन्य अत्याधुनिक विमानों को संचालित करने का अनुभव और आवश्यक तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से मौजूद है।
रणनीतिक महत्व: पश्चिमी सीमा के निकट ऐसे विशाल अभ्यास का आयोजन भारत की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और परिचालन तत्परता का मजबूत संदेश देता है।
'तरंग शक्ति-26' के मुख्य आकर्षण और घटक
इस युद्ध अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भाग लेने वाले देशों की वायुसेनाओं के बीच जटिल हवाई अभियानों की समझ बढ़ाना और तालमेल मजबूत करना है।
स्वदेशी और विदेशी फाइटर जेट्स का संगम: अभ्यास के दौरान भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस (LCA Tejas), सुखोई Su-30 MKI, राफेल (Rafale) और मिराज-2000 आसमान में अपनी गर्जना करेंगे। वहीं विदेशी वायुसेनाएं अपने F-35, F-16, यूरोफाइटर टाइफून और ग्रिपेन जैसे आधुनिक जेट्स के साथ हिस्सा ले रही हैं।
मिड-एयर रिफ्यूलिंग और AWACS का प्रदर्शन: हवा में ही ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों (Air-to-Air Refueling) और हवा से चेतावनी देने वाले प्रणालियों (AWACS) के समन्वित उपयोग का अभ्यास किया जाएगा, जिससे लंबी दूरी के मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम देने की क्षमता विकसित होती है।
नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और रात का अभ्यास: आधुनिक युद्ध प्रणाली नेटवर्क-सेंट्रिक होती है। इस अभ्यास में दिन के साथ-साथ रात के समय भी जटिल कॉम्बैट मिशन, मिसाइल डिफेंस सिमुलेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक का परीक्षण किया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत और 'मेक इन इंडिया' का प्रदर्शन
'तरंग शक्ति-26' केवल एक युद्ध अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के रक्षा उद्योग को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का एक प्रमुख अवसर भी है।
अभ्यास के दौरान एक विशेष 'डिफेंस एक्सपो' (Defense Expo) का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और निजी क्षेत्र के भारतीय रक्षा स्टार्टअप्स अपने नवीनतम उत्पादों और तकनीकों को प्रदर्शित करेंगे। इसमें स्वदेशी ड्रोन, रडार सिस्टम, मिसाइल टेक्नोलॉजी और हेलीकॉप्टरों को विदेशी प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे 'मेक इन इंडिया' और रक्षा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
वैश्विक रक्षा सहयोग और रणनीतिक संदेश
वर्तमान समय में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे माहौल में भारत द्वारा इतने बड़े बहुराष्ट्रीय अभ्यास की मेजबानी करना भारतीय वायुसेना के बढ़ते कद और भारत की 'सॉफ्ट पावर' व 'हार्ड पावर' के संतुलन को दर्शाता है।
आपसी समन्वय और सहयोग: विभिन्न देशों की वायुसेनाएं एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) और रणनीति को समझेंगी, जिससे भविष्य में किसी भी मानवीय सहायता या संयुक्त सैन्य अभियानों में तालमेल बिठाना आसान होगा।
शांति और स्थिरता का संदेश: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर शांति, सुरक्षा और मुक्त समुद्री व हवाई क्षेत्र को बनाए रखने के लिए यह अभ्यास एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
जोधपुर के आसमान में आयोजित हो रहा 'तरंग शक्ति-26' भारतीय वायुसेना के कौशल, अनुशासन और आधुनिकता का जीवंत प्रमाण है। वैश्विक वायु सेनाओं का एक साथ आना भारत की कूटनीतिक और सैन्य क्षमता पर दुनिया के बढ़ते विश्वास को रेखांकित करता है। यह अभ्यास न केवल भारत की सीमाओं को अधिक सुरक्षित बनाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत को एक प्रमुख रक्षा शक्ति के रूप में और अधिक मजबूत करेगा।




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