ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने 'लखपति दीदी' योजना का विस्तार: यूपी के सभी 75 जिलों में लागू करने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और स्वयं सहायता समूहों के जरिए 72 हजार से अधिक महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी', अब राज्य सरकार सभी जिलों में योजना के विस्तार की बना रही है रणनीति।

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की नई क्रांति: 'लखपति दीदी' योजना का सभी 75 जिलों में होगा विस्तार
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने और उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि करने के उद्देश्य से 'लखपति दीदी' योजना का तेजी से विस्तार कर रही है। राज्य सरकार ने अब इस योजना को प्रदेश के सभी 75 जिलों में पूरी क्षमता के साथ लागू करने की व्यापक योजना तैयार की है। वर्तमान में राज्य के 42 जिलों के 7,220 गांवों में संचालित इस पहल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया ढांचा और नई दिशा प्रदान की है।
इस योजना के तहत राज्य की हजारों ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवारों का आर्थिक सहारा बनी हैं, बल्कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और उद्यमिता की एक ऐसी मिसाल कायम की है जो देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक बन रही है। दुग्ध उत्पादन, डेरी प्रबंधन, स्वयं सहायता समूहों (SHG) के संचालन और वित्तीय समावेशन के माध्यम से अब तक 72,000 से अधिक ग्रामीण महिलाएं सफलतापूर्वक 'लखपति दीदी' का दर्जा हासिल कर चुकी हैं।
दुग्ध उत्पादन और डेरी सेक्टर बना सफलता का मुख्य जरिया

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक मजबूती प्रदान करने में दुग्ध व्यवसाय सबसे प्रभावी जरिया साबित हुआ है। राज्य आजीविका मिशन और दुग्ध विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं को संगठित करके दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से जोड़ा गया है।
इस व्यवस्था के अंतर्गत महिलाओं को उन्नत नस्ल के दुधारू पशु खरीदने के लिए आसान किस्तों और सब्सिडी पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही, पशुओं के टीकाकरण, संतुलित आहार (कैटल फीड) और आधुनिक मिल्क टेस्टिंग मशीनों की सुविधा भी उनके दरवाजे तक पहुँचाई गई है। गांव-गांव में 'महिला मिल्क कलेक्शन सेंटर' खोले गए हैं, जहाँ महिलाएं प्रतिदिन दूध जमा करती हैं और उनका भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में बिना किसी बिचौलिए के पारदर्शी तरीके से ट्रांसफर किया जाता है। इससे महिलाओं को नियमित और निश्चित आय प्राप्त हो रही है।
42 जिलों के 7,220 गांवों से पूरे 75 जिलों तक का सफर
योजना के शुरुआती चरणों में इसे प्रयोग के तौर पर प्रदेश के आकांक्षी और ग्रामीण बहुल 42 जिलों में लागू किया गया था। इन जिलों के 7,220 से अधिक गांवों में इसके परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं।
सफलता के इन आंकड़ों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य आजीविका मिशन को इस मॉडल का दायरा बढ़ाकर शेष 33 जिलों में भी त्वरित गति से लागू करने का निर्देश दिया है। नए क्लस्टर्स के गठन के लिए बजट का प्रावधान किया गया है और प्रत्येक जिले में महिला समूहों के कौशल विकास (Skill Development) के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। सरकार का लक्ष्य आगामी वित्तीय वर्षों में लाखों अन्य महिलाओं को भी इस योजना से जोड़कर उन्हें प्रति वर्ष न्यूनतम ₹1,00000 या उससे अधिक की आय अर्जित करने के काबिल बनाना है।
डिजिटल साक्षरता और वित्तीय समावेशन की भूमिका
'लखपति दीदी' योजना की सफलता केवल पशुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल तकनीक और बैंक प्रणालियों से भी मजबूती से जोड़ा है।
बैंक पत्राचार (BC Sakhi): ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पहुँचाने के लिए बैंकिंग करेस्पॉन्डेंट सखियों (BC Sakhis) को तैनात किया गया है, जो खुद प्रति माह सम्मानजनक कमीशन कमा रही हैं और दूसरों को भी वित्तीय लेनदेन में मदद कर रही हैं।
स्मार्ट उपकरणों का उपयोग: दुग्ध समितियों और आजीविका केंद्रों पर डिजिटल तौल मशीनें, माइक्रो-एटीएम और मोबाइल ऐप्स का उपयोग महिलाओं द्वारा स्वयं किया जा रहा है। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास और डिजिटल साक्षरता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
सामाजिक बदलाव और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि
'लखपति दीदी' बनने की इस यात्रा ने ग्रामीण समाज में महिलाओं के प्रति सोच को भी बदला है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होती हैं, तो परिवार और समाज में उनके विचारों और निर्णयों को सम्मान मिलता है। बच्चों की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर भी इस बढ़ी हुई आय का सीधा धनात्मक असर दिखाई दे रहा है।
योजना के विस्तार से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आगामी महीनों में सिलाई-कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), जैविक खेती और हस्तशिल्प जैसे अन्य क्षेत्रों को भी 'लखपति दीदी' मॉडल में शामिल किया जाएगा, ताकि गैर-कृषि क्षेत्रों की महिलाएं भी अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आजीविका चुन सकें।




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