दिल्ली में ऊंची इमारतों के लिए कड़े हुए फायर सेफ्टी नियम: 6-मीटर फायर एक्सेस, रिफ्यूज एरिया और फायर लिफ्ट हुई अनिवार्य
दिल्ली सरकार और दिल्ली फायर सर्विस (DFS) ने बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। आपात स्थिति में त्वरित बचाव और धुएं से बचाव के लिए कड़े प्रावधान अनिवार्य किए गए हैं।

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दिल्ली में बहुमंजिला इमारतों के लिए नए और कड़े फायर सेफ्टी नियम लागू: 6-मीटर फायर एक्सेस रोड, रिफ्यूज एरिया और फायर लिफ्ट अनिवार्य
नई दिल्ली:
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ रही बहुमंजिला इमारतों (High-Rise Buildings) की सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार के गृह विभाग और दिल्ली फायर सर्विस (DFS) ने अग्नि सुरक्षा नियमों में ऐतिहासिक संशोधन करते हुए नए नियम अधिसूचित किए हैं। हाल के दिनों में व्यावसायिक और आवासीय परिसरों में सामने आईं आग की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 18 से अधिक कड़े दिशानिर्देश अनिवार्य कर दिए हैं।
1. 6-मीटर चौड़ा 'फायर इंजन एक्सेस रोड' अनिवार्य
नए संशोधनों के तहत सभी हाई-राइज और व्यावसायिक परिसरों के चारों ओर कम से कम 6-मीटर चौड़ा ऑल-वेदर हार्ड सरफेस एक्सेस मार्ग (Fire Vehicle Access Road) रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस मार्ग की भार-वहन क्षमता (Load Capacity) कम से कम 45 टन रखी गई है, ताकि भारी हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और अग्निशमन वाहन बिना किसी रुकावट के इमारत के हर कोने तक पहुंच सकें।
इस 6-मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण, पार्किंग, रैंप या सजावटी पेड़-पौधे लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
2. सुरक्षित 'रिफ्यूज एरिया' (Refuge Area) का कड़ाई से पालन
15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों में आपात स्थिति के दौरान निवासियों को सुरक्षित ठिकाना प्रदान करने के लिए 'रिफ्यूज एरिया' के मानकों को और सख्त किया गया है:
निश्चित अंतराल: नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) के अनुरूप हर 7वीं या 8वीं मंजिल (या 24 मीटर से ऊपर) पर एक समर्पित फायर-प्रतिरोधी (Fire-Resistant) रिफ्यूज एरिया का निर्माण करना होगा।
सुरक्षा मानक: रिफ्यूज एरिया का निर्माण कम से कम 2 घंटे की अग्नि-प्रतिरोधक दीवारों से होना चाहिए। इस क्षेत्र में जहरीले धुएं को जमा होने से रोकने के लिए स्वतंत्र वेंटिलेशन प्रणाली या ओपन-बालकनी लेआउट अनिवार्य है।
गैर-व्यावसायिक उपयोग: रिफ्यूज एरिया को किसी भी स्थिति में निजी इस्तेमाल, स्टोर रूम या सोसाइटी हॉल के रूप में इस्तेमाल करना गैर-कानूनी घोषित किया गया है।
3. समर्पित 'फायर लिफ्ट' और फायर टॉवर (Fire Lifts & Towers)
30 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों में दमकलकर्मियों और बचाव दलों की त्वरित आवाजाही के लिए समर्पित 'फायर लिफ्ट' (Fire Lifts) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
इमरजेंसी पावर सप्लाई: फायर लिफ्ट में अलग से इमरजेंसी जनरेटर और ऑटोमैटिक स्विचिंग सिस्टम (UPS/DG Set) होगा, जिससे इमारत की मुख्य बिजली बंद होने के बावजूद लिफ्ट सुचारू रूप से काम कर सके।
धुआं-मुक्त सीढ़ियां (Pressurised Staircases): मुख्य सीढ़ियों में प्रेसराइजेशन सिस्टम (Positive Air Pressure) अनिवार्य किया गया है, ताकि आग लगने की स्थिति में सीढ़ियों में धुआं न भर सके और लोग आसानी से बाहर निकल सकें।
4. स्मोक बैरियर और स्वचालित अग्निशमन प्रणाली
इमारत के भीतर आग और धुएं को फैलने से रोकने के लिए प्रत्येक मंजिल पर स्वचालित स्मोक बैरियर (Smoke Barriers) और फायर-चेक डोर्स (Fire Check Doors) लगाने का निर्देश दिया गया है।
बेसमेंट, पार्किंग और सभी कॉमन एरिया में आधुनिक फायर स्प्रिंकलर (Fire Sprinklers), स्वचालित फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर सिस्टम का होना अनिवार्य है।
बहुमंजिला अस्पतालों, मॉल, शैक्षणिक संस्थानों और ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के लिए वार्षिक फायर सेफ्टी ऑडिट कराना और वैध फायर एनओसी (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
प्रशासन की चेतावनी और कड़े दंड का प्रावधान
दिल्ली अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन इमारतों में नए सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नए मानकों का पालन न करने वाली इमारतों का बिजली व पानी का कनेक्शन काटा जा सकता है तथा उनके फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।
दिल्ली सरकार के इस कदम से न केवल आपात स्थितियों में दमकल विभाग का रिस्पॉन्स टाइम बेहतर होगा, बल्कि लाखों निवासियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को मजबूत आधार मिलेगा।




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