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NEET-UG परीक्षा पैटर्न में ऐतिहासिक बदलाव: अब पेन-पेपर नहीं, कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में होगी परीक्षा

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट-यूजी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए पेन-पेपर OMR फॉर्मेट को समाप्त कर पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने का बड़ा निर्णय लिया है।

विद्रोही आनंद डेस्क
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NEET-UG परीक्षा में बड़ा बदलाव: अब पेन-पेपर नहीं, कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित होगी मेडिकल प्रवेश परीक्षा

देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) तथा केंद्रीय शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) की आयोजन प्रक्रिया में व्यापक सुधार करते हुए एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। अब से NEET-UG परीक्षा का आयोजन पारंपरिक पेन-और-पेपर (OMR शीट) माध्यम के बजाय कंप्यूटर आधारित टेस्ट (Computer Based Test - CBT) मोड में किया जाएगा। यह कदम प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मेडिकल पाठ्यक्रमों (MBBS, BDS, BAMS, BHMS आदि) में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली NEET-UG परीक्षा देश की सबसे कठिन और बड़ी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसमें हर साल 20 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में प्रश्नपत्र लीक, ओएमआर शीट में हेरफेर और परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ियों से जुड़ी शिकायतों के बाद, सरकार और NTA पर परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने का लगातार दबाव था।

बदलाव की मुख्य वजह: सुरक्षा, पारदर्शिता और पेपर लीक पर रोक

NTA और उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति (High-Level Committee of Experts) द्वारा किए गए गहन अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि डिजिटल परीक्षा प्रणाली (CBT) भौतिक प्रश्नपत्रों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और लीक-प्रूफ होती है।

  1. पेपर लीक की संभावना समाप्त: भौतिक प्रश्नपत्रों के मुद्रण, परिवहन, सुरक्षा और देश भर के हजारों परीक्षा केंद्रों तक वितरण के दौरान लीकेज का जोखिम बना रहता था। CBT मोड लागू होने से प्रश्नपत्र सीधे परीक्षा के समय ही एनक्रिप्टेड सर्वर से कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित होंगे, जिससे पेपर लीक का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

  2. OMR शीट में धांधली पर रोक: पूर्व में ओएमआर शीट को बदलने या उसमें बाद में छेड़छाड़ करने के आरोप उठते रहे हैं। डिजिटल मोड में अभ्यर्थी द्वारा चुना गया उत्तर तुरंत सिस्टम में रिकॉर्ड हो जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार के मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

  3. परिणामों में तेज़ी और सटीकता: ओएमआर शीट की स्कैनिंग में काफी समय लगता था और कई बार तकनीकी त्रुटियां भी आ जाती थीं। कंप्यूटर आधारित मूल्यांकन से परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया त्वरित, पारदर्शी और सटीक होगी।

CBT मोड में कैसे होगी परीक्षा? जानें नया पैटर्न

कंप्यूटर आधारित परीक्षा में प्रवेश करने से पहले छात्रों को प्रक्रिया को समझना आवश्यक है:

  • स्क्रीन पर प्रश्न पत्र: छात्रों को परीक्षा केंद्र पर आवंटित कंप्यूटर सिस्टम के सामने बैठना होगा। प्रश्न पत्र उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध रहेगा।

  • उत्तर चुनने का विकल्प: प्रत्येक बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) के लिए चार विकल्प होंगे। अभ्यर्थी माउस की मदद से सही विकल्प पर क्लिक कर अपना उत्तर सेव करेंगे।

  • उत्तर बदलने की सुविधा: पारंपरिक ओएमआर शीट की तुलना में CBT का एक बड़ा लाभ यह है कि यदि अभ्यर्थी अपना उत्तर बदलना चाहता है, तो वह परीक्षा की निर्धारित समय अवधि के भीतर कभी भी उत्तर बदल (Edit/Review) सकता है, जबकि ओएमआर शीट पर एक बार गोला भरने के बाद उसे बदला नहीं जा सकता था।

  • रफ वर्क की व्यवस्था: न्यूमेरिकल और वैज्ञानिक प्रश्नों को हल करने के लिए अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के अंदर ही रफ शीट (Blank Sheets) प्रदान की जाएगी, जिसे परीक्षा समाप्त होने पर वापस जमा करना होगा।

बहु-पाली (Multi-Shift) बनाम एकल पाली परीक्षा

CBT मोड को लागू करने के साथ ही परीक्षा के शेड्यूल पर भी मंथन किया जा रहा है। चूंकि देश भर में 20 लाख से अधिक छात्रों के लिए एक ही समय में कंप्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना एक बड़ी तकनीकी चुनौती हो सकती है, इसलिए संभावना जताई जा रही है कि परीक्षा को दो या अधिक पालियों (Multi-shifts) में आयोजित किया जा सकता है।

यदि परीक्षा बहु-पालियों में आयोजित की जाती है, तो विभिन्न पालियों के प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर को संतुलित करने के लिए 'नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया' (Normalization Process) को अपनाया जाएगा, जैसा कि JEE Main और CUET जैसी अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में किया जाता है।

छात्रों और कोचिंग संस्थानों पर प्रभाव

इस बदलाव का सीधा असर अभ्यर्थियों की तैयारी की रणनीति पर पड़ेगा:

  • डिजिटल मॉक टेस्ट का अभ्यास: अब छात्रों को केवल किताबों और ओएमआर शीट पर अभ्यास करने के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रश्न पढ़ने और टाइम मैनेजमेंट सीखने का अभ्यास करना होगा।

  • लैपटॉप/कंप्यूटर की आदत: जो छात्र ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं या जिन्हें कंप्यूटर चलाने का अनुभव कम है, उन्हें NTA द्वारा स्थापित किए जाने वाले टेस्ट प्रैक्टिस सेंटर्स (TPCs) के माध्यम से मुफ्त अभ्यास का अवसर दिया जाएगा।

  • तकनीकी झिझक दूर करना: कोचिंग संस्थानों को भी अपने टेस्ट सीरीज़ के पैटर्न को डिजिटल फॉर्मेट में बदलना होगा ताकि छात्र परीक्षा हॉल के माहौल से सहज हो सकें।

विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की राय

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस कदम का व्यापक स्वागत किया है। उनका मानना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसी राष्ट्रीय महत्व की परीक्षा में तकनीक का समावेश समय की मांग थी। देश के प्रमुख शिक्षाविदों का कहना है कि JEE Main जैसी प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग परीक्षा वर्षों से सफलतापूर्वक CBT मोड में आयोजित की जा रही है और इसमें सुरक्षा या तकनीकी खामियों की शिकायतें न के बराबर आई हैं। NEET-UG में भी इसे लागू करने से मेधावी छात्रों को न्याय मिलेगा और किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों के उपयोग पर पूर्ण विराम लगेगा।

निष्कर्ष

NEET-UG परीक्षा का कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में परिवर्तन भारतीय उच्च शिक्षा सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। हालांकि, 20 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के लिए निर्बाध और सुरक्षित कंप्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था करना NTA के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी। यदि इस प्रणाली को सुदृढ़ तकनीकी सुरक्षा के साथ लागू किया जाता है, तो यह न केवल देश की मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करेगी, बल्कि लाखों योग्य एवं परिश्रमी छात्रों के भविष्य और उनके डॉक्टर बनने के सपने को भी सुरक्षा प्रदान करेगी।

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