सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण: 18 घंटों में बदली कलेक्ट्रेट की पूरी तस्वीर, जहां थी मस्जिद; अब वहां बनी सपाट जमीन
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण: 18 घंटों की कार्रवाई में बदली कलेक्ट्रेट की तस्वीर; जहां थी मस्जिद, अब वहां बनी सपाट जमीन

सहारनपुर: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी वर्षों पुरानी मस्जिद को प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। मात्र 18 घंटे चले इस बड़े प्रशासनिक अभियान के बाद कलेक्ट्रेट परिसर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जिस स्थान पर दो मंजिला मस्जिद का ढांचा खड़ा था, अब वहां केवल सपाट और समतल जमीन नजर आ रही है।
रात भर चला ऑपरेशन, सुबह तक गिरा दी गई इमारत

प्रशासनिक और पुलिस अमले ने खुफिया रिपोर्ट और सुरक्षा स्थिति का जायजा लेने के बाद शुक्रवार रात से ही कलेक्ट्रेट परिसर की घेराबंदी शुरू कर दी थी। कलेक्ट्रेट के सभी पांचों मुख्य दरवाजों को सील कर बाहरी लोगों का प्रवेश रोक दिया गया था। देर रात दर्जनों जेसीबी मशीनें, डंपर और पोकलैंड कलेक्ट्रेट परिसर में दाखिल हुए और शनिवार तड़के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई।
18 घंटे लगातार चले इस ऑपरेशन में मस्जिद के पूरे ढांचे को जमींदोज करने के बाद वहां जमा टनों मलबे को डंपरों के जरिए हटाकर जमीन को पूरी तरह सपाट कर दिया गया।
क्या था कानूनी विवाद?
कलेक्ट्रेट परिसर की लगभग 315 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर बनी इस मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।
16 जुलाई 2026: सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मस्जिद को अवैध कब्जा मानते हुए बेदखली का आदेश दिया था और ₹6.41 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था।
02 सितंबर 2026: जिला जज की अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को सही ठहराया।
अदालत का फैसला आने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निर्माण को हटा दिया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भारी पुलिस बल की तैनाती
कार्रवाई के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे जिले में हाई अलर्ट घोषित किया गया था। कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में स्थानीय पुलिस बल के साथ-साथ पीएसी (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान तैनात रहे। डीआईजी अभिषेक सिंह और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहकर स्थिति पर नजर बनाए रहे।
मलबे के नीचे से मिला 20 फीट गहरा कुआं
रविवार को जब कलेक्ट्रेट परिसर से अवशेष व मलबा हटाने का काम अंतिम चरण में था, तब जमीन के नीचे एक भारी-भरकम कंक्रीट स्लैब दिखाई दिया। पोकलैंड और कटर मशीनों की मदद से जब उस स्लैब को काटा गया, तो उसके नीचे से लगभग 20 फीट गहरा और डेढ़ मीटर चौड़ा कुआं निकला। यह कुआं प्रशासनिक अधिकारियों और आम लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है।




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