सहारनपुर PNB जाली नोट मामला: NIA की बड़ी कार्रवाई, फरार बैंक मैनेजर गिरफ्तार; 17.29 करोड़ का संदिग्ध नेटवर्क बेनकाब
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट से बरामद 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोटों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने फरार बैंक मैनेजर अमित कुमार को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया है। जानें क्या है पूरा मामला और कैसे खुला यह फर्जीवाड़ा।

सहारनपुर PNB जाली नोट मामला: NIA की बड़ी कार्रवाई, चंडीगढ़ से गिरफ्तार हुआ फरार बैंक मैनेजर अमित कुमार
सहारनपुर/लखनऊ:

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये के नकली भारतीय मुद्रा (FICN) बरामदगी के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी सफलता हासिल की है। एजेंसी ने मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल और घटना के बाद से फरार चल रहे PNB बैंक मैनेजर अमित कुमार को चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया है। एनआईए की लखनऊ इकाई ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को उसके रिश्तेदार के घर से धर दबोचा। यह मामला इसलिए बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि नकली नोटों की इतनी बड़ी खेप किसी सीमावर्ती इलाके, तस्कर या आपराधिक ठिकाने से नहीं, बल्कि सीधे सरकारी बैंकिंग प्रणाली के सबसे सुरक्षित हिस्से 'करेंसी चेस्ट' से मिली है।
मामले का खुलासा कैसे हुआ?
इस विशालकाय फर्जीवाड़े की शुरुआत अगस्त 2026 के पहले सप्ताह में हुई थी। सहारनपुर के सोफिया मार्केट स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की मुख्य शाखा से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जयपुर स्थित करेंसी चेस्ट को नकदी भेजी गई थी। जब जयपुर आरबीआई कार्यालय में नोटों की गिनती और जांच शुरू हुई, तो बैंक अधिकारियों को कुछ बंडलों में नोटों की भारी कमी और विसंगतियां नजर आईं। शुरुआती जांच में लगभग 4 लाख रुपये की कमी दर्ज की गई।
इसके बाद रिजर्व बैंक और पंजाब नेशनल बैंक मुख्यालय ने संयुक्त रूप से मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए। 9 अगस्त 2026 से सहारनपुर करेंसी चेस्ट का गहन ऑडिट और नोटों की भौतिक री-काउंटिंग (गिनती) शुरू की गई। ऑडिट टीम जब ₹500 के नोटों के बंडलों की जांच कर रही थी, तो उनके होश उड़ गए। बंडलों के ऊपर और नीचे तो असली नोट लगाए गए थे, लेकिन बीच के सभी नोट जाली और घटिया गुणवत्ता के थे।
शुरुआती दो दिनों में करीब ₹7.40 करोड़ रुपये के नकली नोट पकड़े गए। लेकिन जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ता गया, करेंसी चेस्ट में रखे कुल 148 से अधिक बंडलों की जांच पूरी हुई और यह आंकड़ा बढ़कर चौंकाने वाले 17.29 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
पुलिस FIR से लेकर NIA तक का सफर
सहारनपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई प्राथमिकी:
मामले की गंभीरता को देखते हुए 29 अगस्त 2026 को सहारनपुर के थाना सदर बाजार में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 178 के तहत मामला (FIR No. 0431/2026) दर्ज किया गया। जांच के दौरान बैंक कर्मचारियों की सीधी संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद पीएनबी प्रबंधन ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
गृह मंत्रालय का हस्तक्षेप और NIA को कमान:
इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोटों का मिलना देश की आर्थिक सुरक्षा और बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा था। इस बात की भी प्रबल आशंका थी कि इन नकली नोटों का तार अंतरराष्ट्रीय गिरोहों, सीमा पार (नेपाल/बांग्लादेश) स्मगलिंग नेटवर्क और आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Funding) से जुड़ा हो सकता है। इसे देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी।
NIA द्वारा नया मामला दर्ज:
एनआईए की लखनऊ शाखा ने 3 सितंबर 2026 को इस केस को अपने हाथ में लेते हुए पुन: मामला (RC-02/2026/NIA/LKW) दर्ज किया और जांच दल गठित कर दिए।
कैसे हत्थे चढ़ा फरार बैंक मैनेजर अमित कुमार?
मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद से ही करेंसी चेस्ट के पूर्व कस्टोडियन और वर्तमान में यमुनानगर-जगाधरी में कार्यरत बैंक मैनेजर अमित कुमार पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था।
एनआईए की टीम ने अमित कुमार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और संभावित ठिकानों की निगरानी शुरू की। जांच में पाया गया कि अमित लगातार चंडीगढ़ में रह रहे अपने साले (Brother-in-law) के संपर्क में था। एनआईए की लखनऊ और चंडीगढ़ टीमों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाते हुए 7 सितंबर की रात चंडीगढ़ स्थित एक आवास पर छापेमारी की और अमित कुमार को हिरासत में ले लिया।
आरोपी को चंडीगढ़ की विशेष एनआईए अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे लखनऊ ले जाने के लिए 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड (Transit Remand) दे दी। अब एनआईए लखनऊ की विशेष अदालत में अमित कुमार को पेश कर उसकी कस्टडी रिमांड मांगेगी ताकि जाली नोटों के स्रोत का पता लगाया जा सके।
तीन बैंक अधिकारियों पर गिरी गाज
पीएनबी की आंतरिक जांच रिपोर्ट और पुलिस इंक्वायरी के आधार पर तीन प्रमुख बैंक कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिन्हें बैंक ने निलंबित कर दिया है:
अमित कुमार: तत्कालीन संयुक्त कस्टोडियन एवं बैंक मैनेजर (गिरफ्तार)।
सुशील कुमार (सुशील शर्मा): सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट के वर्तमान मैनेजर।
रवि कुमार कान्से: सीनियर डिविजनल मैनेजर कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी।
इसके अलावा जांच के दौरान करेंसी चेस्ट के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी खंगाले गए। सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में चेस्ट के अंदर काम करने वाले एक पार्ट-टाइम हाउसकीपर (विशाल कुमार) की संदिग्ध गतिविधियां भी कैद हुई हैं, जो कथित तौर पर बंडलों में से असली नोट निकालता और जमा करता दिख रहा था।
NIA की जांच का मुख्य केंद्र: 4 बड़े सवाल
एनआईए अब इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है:
1. जाली नोटों का स्रोत (Source of Counterfeit Currency):
इतनी उच्च गुणवत्ता वाले ₹500 के नकली नोट कहां छापे गए थे? क्या इन्हें पाकिस्तान से नेपाल या बांग्लादेश के रास्ते भारत में लाया गया था? एनआईए नेपाल लिंक की भी गहनता से जांच कर रही है।
2. असली नकदी कहां गई? (Where is the Genuine Cash?):
करेंसी चेस्ट से जो ₹17.29 करोड़ रुपये के असली नोट निकाले गए, उन्हें कहां खपाया गया या किस बेनामी संपत्ति/अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया?
3. बैंकिंग चैनलों का दुरुपयोग:
क्या इन नकली नोटों में से कुछ हिस्से को पहले ही आम जनता, एटीएम (ATM) या अन्य बैंकों में वितरित किया जा चुका है?
4. नेटवर्क में शामिल अन्य मोहरे:
क्या बैंक के अधिकारियों के अलावा बाहरी कोई बड़ा माफिया, नेता या अंतर्राष्ट्रीय गिरोह इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड है?
बैंकिंग सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा
सहारनपुर का यह मामला भारत के बैंकिंग इतिहास की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली करेंसी चेस्ट सेंधमारी में से एक है। सामान्य तौर पर करेंसी चेस्ट को बायोमेट्रिक सुरक्षा, डबल-की (Double-Key) सिस्टम और 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों की सख्त निगरानी में रखा जाता है। जब बैंक के अपने ही अधिकारी और कस्टोडियन ही इस तरह की जालसाजी में शामिल पाए जाते हैं, तो पूरी प्रणाली खोखली नजर आने लगती है।




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