मेडिकल स्टोर्स पर पारदर्शिता के लिए यूपी सरकार की नई गाइडलाइन: दवाओं की उपलब्धता और मूल्य का डिजिटल डेटा प्रदर्शित करना अनिवार्य
उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी रिटेल मेडिकल स्टोर्स और दवा विक्रेताओं के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। अब दवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता, स्टॉक विवरण और दरों को प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा ताकि मरीजों को कालाबाजारी और फर्जीवाड़े से राहत मिल सके।

मेडिकल स्टोर्स पर पारदर्शिता के लिए यूपी सरकार की नई गाइडलाइन: दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक का डिजिटल विवरण प्रदर्शित करना अब अनिवार्य
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और मरीज-अनुकूल बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और सुधारात्मक कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी निजी और सरकारी रिटेल मेडिकल स्टोर्स के लिए नई गाइडलाइंस (दिशा-निर्देश) जारी की हैं। इसके तहत अब राज्य के सभी दवा विक्रेताओं को अपनी दुकानों पर उपलब्ध जीवन रक्षक और सामान्य दवाओं का डिजिटल डेटाबेस तैयार करना होगा और उसे ऑनलाइन पोर्टल अथवा अपनी आधिकारिक डिजिटल प्रणाली पर प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है।
क्या हैं नई गाइडलाइंस के मुख्य प्रावधान?
राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को दवाओं की जमाखोरी, कालाबाजारी और अप्रत्याशित दामों से बचाना है। नए नियमों के अंतर्गत:
स्टॉक और दरों की डिजिटल जानकारी: प्रत्येक रिटेल मेडिकल स्टोर को अपने पास उपलब्ध दवाओं के स्टॉक, उनके बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की जानकारी डिजिटल माध्यम पर अपडेट रखनी होगी।
पोर्टल और डिस्प्ले बोर्ड: बड़े शहरों और प्रमुख अस्पतालों के आसपास स्थित मेडिकल स्टोर्स को अपना डेटा स्वास्थ्य विभाग के केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल से जोड़ना होगा या अपनी दुकान पर डिजिटल क्यूआर/डिप्ले स्क्रीन के जरिए दवाओं की उपलब्धता दर्ज करानी होगी।
ऑनलाइन बिलिंग अनिवार्य: बिना डिजिटल कंप्यूटराइज्ड रसीद/बिल के दवा की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। बिल पर दवा का नाम, निर्माण तिथि और बैच नंबर स्पष्ट होना चाहिए।
मरीजों और आम जनता को क्या मिलेगा लाभ?
अक्सर देखा जाता है कि आपातकालीन स्थिति या महामारी/मौसमी बीमारियों के फैलाव के दौरान जीवन रक्षक दवाओं की कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी जाती है। इस नई व्यवस्था से:
समय की बचत: मरीज या उनके परिजन बिना दर-दर भटके मोबाइल अथवा ऑनलाइन सिस्टम के जरिए जान सकेंगे कि उनके क्षेत्र के किस मेडिकल स्टोर पर कौन-सी दवा उपलब्ध है।
पारदर्शिता और सही मूल्य: दवाओं के एमआरपी और जेनेरिक विकल्पों की जानकारी मिलने से मरीजों से अधिक दाम वसूलने की शिकायतों पर प्रभावी रोक लगेगी।
फर्जी और गुणवत्ताहीन दवाओं पर अंकुश: डिजिटल ट्रैकिंग से नकली या समय-सीमा समाप्त (Expired) दवाओं की बिक्री पर नकेल कसी जा सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग का सख्त रुख
प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नई गाइडलाइंस को चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जा रहा है। प्रथम चरण में इसे लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आगरा और मेरठ जैसे बड़े नगर निगम क्षेत्रों में अनिवार्य किया जाएगा।
दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले या दवाओं की गलत डिजिटल प्रविष्टि दर्ज कराने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों के लाइसेंस रद्द करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। सरकार के इस फैसले से पूरे प्रदेश की दवा वितरण प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता का एक नया युग शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।




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