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सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा बताया

फलोदी सड़क हादसे से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को जीवन के अधिकार से जोड़ते हुए देशभर के लिए अंतरिम निर्देश जारी किए।

विद्रोही आनंद डेस्क

सुप्रीम कोर्ट ने 20 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सड़क और यात्री सुरक्षा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। यह फैसला राजस्थान के फलोदी में हुए एक सड़क हादसे से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आया।

न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अनुच्छेद 21 केवल किसी की जान गैरकानूनी तरीके से लिए जाने के खिलाफ सुरक्षा भर नहीं है, बल्कि यह राज्य पर एक ऐसा सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने का सकारात्मक दायित्व भी डालता है, जिसमें मानव जीवन को संरक्षित और महत्व दिया जाए।

पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राजमार्ग दुर्घटनाओं को रोकने से जुड़े देशभर के लिए अंतरिम निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े मौजूदा नियमों के पालन में ढिलाई के चलते हर साल बड़ी संख्या में जानें जाती हैं।

यह मामला मूल रूप से फलोदी में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा था, जिसकी सुनवाई के दौरान अदालत ने पूरे देश में सड़क सुरक्षा से जुड़े व्यापक पहलुओं पर भी विचार किया। पीठ ने संबंधित राज्य सरकारों और प्राधिकरणों से इस दिशा में ठोस कदम उठाने को कहा।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से आने वाले समय में राज्य सरकारों और सड़क सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों की जवाबदेही और बढ़ सकती है, क्योंकि अब सड़क सुरक्षा को सीधे तौर पर मौलिक अधिकार से जोड़ दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन इस फैसले में पहली बार सड़क सुरक्षा को स्पष्ट रूप से अनुच्छेद 21 के दायरे में शामिल किया गया है, जिसे कानूनी हलकों में एक अहम मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।

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