वाराणसी एनकाउंटर: 30 लाख का इनामी एनआईए वांछित नक्सली कमांडर बृजेश गंजू ढेर
यूपी पुलिस और सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई; प्रतिबंधित संगठन TPC के प्रमुख बृजेश गंजू उर्फ गोपाल सिंह को वाराणसी मुठभेड़ में किया गया ढेर।

वाराणसी: उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। धर्मनगरी वाराणसी के बाहरी क्षेत्र में हुई एक भीषण मुठभेड़ में सुरक्षा बलों और यूपी पुलिस की संयुक्त टीम ने प्रतिबंधित वामपंथी उग्रवादी संगठन 'तृतीय प्रस्तुति कमेटी' (TPC) के शीर्ष कमांडर बृजेश गंजू (उर्फ गोपाल सिंह) को मार गिराया है। मारे गए नक्सली कमांडर पर सरकार और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से 30 लाख रुपये का भारी इनाम घोषित था।
यह एनकाउंटर देश में सक्रिय नक्सली नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे समन्वित अभियानों में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में टीपीसी जैसे खतरनाक उग्रवादी संगठन के प्रमुख का मारा जाना सुरक्षा तंत्र की बड़ी रणनीति की सफलता को दर्शाता है।
गुप्त सूचना के आधार पर चला घेराबंदी अभियान
पुलिस और सुरक्षा बलों को खुफिया एजेंसियों के माध्यम से सटीक जानकारी मिली थी कि अंतरराज्यीय नक्सली कमांडर बृजेश गंजू वाराणसी क्षेत्र में अपने कुछ सहयोगियों से मिलने और किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के इरादे से छिपा हुआ है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए यूपी पुलिस के विशेष दस्ते और सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से संबंधित इलाके की घेराबंदी शुरू की।
जैसे ही सुरक्षा बलों की टीम ने संदिग्ध ठिकाने को घेरकर आत्मसमर्पण की चेतावनी दी, वैसे ही अंदर छिपे उग्रवादियों ने आधुनिक हथियारों से स्वचालित फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाला और आत्मरक्षा में गोलियां चलाईं। कई दौर की भारी गोलाबारी के बाद जब गोलीबारी थमी, तो तलाशी अभियान के दौरान बृजेश गंजू का शव और कई घातक हथियार बरामद किए गए।
कौन था 30 लाख का इनामी बृजेश गंजू उर्फ गोपाल सिंह?
बृजेश गंजू उर्फ गोपाल सिंह प्रतिबंधित नक्सली संगठन 'तृतीय प्रस्तुति कमेटी' (TPC) का शीर्ष कमांडर और प्रमुख रणनीतिकार था। वह मुख्य रूप से झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय था।
एनआईए (NIA) की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल: बृजेश गंजू के खिलाफ कई राज्यों में हत्या, रंगदारी, लेवी वसूली, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षा बलों पर घातक हमलों के दर्जनों गंभीर मामले दर्ज थे। एनआईए और विभिन्न राज्य पुलिस बल लंबे समय से उसकी तलाश कर रहे थे।
टीपीसी (TPC) का संगठनात्मक ढांचा: भाकपा (माओवादी) से अलग होकर बने टीपीसी संगठन में बृजेश गंजू ने मुख्य वित्तीय और सैन्य रणनीतिकार के रूप में अपनी पकड़ मजबूत की थी। वह खनन व्यवसायियों, ठेकेदारों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से अवैध लेवी वसूलने के नेटवर्क का संचालन करता था।
सामरिक नेटवर्क और हथियार आपूर्ति: गंजू न केवल उग्रवादी कैडरों को प्रशिक्षित करता था, बल्कि सीमा पार और अन्य माध्यमों से अवैध हथियारों व गोला-बारूद की आपूर्ति की देखरेख भी करता था।
मुठभेड़ स्थल से अत्याधुनिक असलहे बरामद
मुठभेड़ खत्म होने के बाद फॉरेंसिक टीम और पुलिस बल ने घटनास्थल को सील कर गहन तलाशी अभियान चलाया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मौके से कई स्वचालित एवं घातक हथियार, भारी मात्रा में कारतूस, वॉकी-टॉकी सेट और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं।
बरामद दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट होता है कि उग्रवादी संगठन उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में अपना आधार फैलाने और नए कैडरों की भर्ती की योजना बना रहा था। पुलिस फॉरेंसिक नमूनों और बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है ताकि उसके अन्य नेटवर्क का भी पता लगाया जा सके।
सुरक्षा बलों और पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया
इस बड़ी सफलता के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन सुरक्षा बलों के आपसी तालमेल और सटीक खुफिया तंत्र का परिणाम है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश की धरती पर किसी भी प्रकार की असामाजिक, उग्रवादी या आतंकवादी गतिविधियों को पनपने नहीं दिया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि बृजेश गंजू के मारे जाने से टीपीसी संगठन की रीढ़ टूट गई है और इसका असर पूरे क्षेत्रीय नक्सली नेटवर्क पर पड़ेगा। इस एनकाउंटर में शामिल पुलिस जवानों और सुरक्षा बलों की टीम को उचित सम्मान और इनाम देने की सिफारिश भी की गई है।
नक्सल विरोधी अभियानों पर इसका प्रभाव
विगत कुछ वर्षों में भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। इस नीति के तहत दूरदराज के जंगलों के साथ-साथ शहरी और मैदानी इलाकों में छिपे उग्रवादियों के खिलाफ भी कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण और सांस्कृतिक शहर में एक इतने बड़े नक्सली कमांडर का पकड़ा जाना या मारा जाना यह साबित करता है कि सुरक्षा तंत्र अब अत्यंत सतर्क है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से उग्रवादी गुटों का मनोबल टूटेगा और झारखंड-बिहार सीमावर्ती क्षेत्रों में लेवी वसूली एवं उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में भारी कमी आएगी।
निष्कर्ष
वाराणसी में 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली बृजेश गंजू का एनकाउंटर देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सुरक्षा बलों की इस मुस्तैदी से न केवल एक खूंखार उग्रवादी का अंत हुआ, बल्कि पूर्वांचल क्षेत्र में उग्रवाद के पैर पसारने की साजिश को भी शुरुआती चरण में ही नाकाम कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की यह संयुक्त कार्रवाई राज्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।




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