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केंद्र सरकार ने सीमावर्ती देशों से निवेश को लेकर एफडीआई नियमों में दी ढील

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रेस नोट 3 में संशोधन को मंज़ूरी दी, जिससे चीन-पाकिस्तान समेत सीमावर्ती देशों से सीमित निवेश की प्रक्रिया आसान होगी।

विद्रोही आनंद डेस्क

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को भारत के साथ ज़मीनी सीमा साझा करने वाले देशों से होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से जुड़े नियमों में संशोधन को मंज़ूरी दी। इससे पहले प्रेस नोट 3 के तहत ऐसे सभी निवेशों के लिए सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य थी।

नए प्रावधानों के तहत सरकार ने 'बेनिफिशियल ओनर' यानी वास्तविक लाभार्थी स्वामी की परिभाषा को स्पष्ट किया है, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम नियमों के अनुरूप तय किया गया है।

संशोधन के मुताबिक अगर किसी सीमावर्ती देश के निवेशक की किसी कंपनी में वास्तविक हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है और उसका कंपनी के प्रबंधन पर कोई नियंत्रण नहीं है, तो ऐसा निवेश स्वतः मंज़ूरी वाले मार्ग से किया जा सकेगा।

इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, कैपिटल गुड्स, पॉलीसिलिकॉन और इनगॉट-वेफर निर्माण जैसे कुछ चुनिंदा विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों पर अब 60 दिनों के भीतर फैसला लिया जाएगा, जिससे मंज़ूरी प्रक्रिया में तेज़ी आने की उम्मीद है।

यह नीति चीन, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार और अफ़ग़ानिस्तान जैसे भारत से ज़मीनी सीमा साझा करने वाले देशों पर लागू होती है। सरकार का कहना है कि यह कदम सुरक्षा संबंधी सतर्कता बनाए रखते हुए विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से उठाया गया है।

उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि इस संशोधन से इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में आपूर्ति शृंखला से जुड़े निवेश प्रस्तावों को गति मिलेगी, हालांकि संवेदनशील क्षेत्रों में सरकार की मंज़ूरी अब भी अनिवार्य बनी रहेगी।

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