पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बलिदान दिवस पर 'शक्ति स्थल' पर उमड़ा नमन का सैलाब, राहुल और प्रियंका गांधी ने साझा किए भावुक संस्मरण
देश की पहली महिला प्रधानमंत्री की पुण्यतिथि पर सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत देश भर के नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, भारत की एकता और अखंडता के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को किया याद

प्रस्तावना: देश की 'आयरन लेडी' को राष्ट्र का कोटि-कोटि नमन
31 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में एक अत्यंत भावुक और ऐतिहासिक मोड़ के रूप में दर्ज है। इसी दिन वर्ष 1984 में भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री और 'आयरन लेडी' के नाम से विख्यात श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश की अखंडता की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के बलिदान दिवस पर राजधानी नई दिल्ली स्थित उनके समाधि स्थल 'शक्ति स्थल' पर उन्हें भावभिनि श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए जनसैलाब और गणमान्य हस्तियों का तांता लगा रहा।
देश भर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए उनके अदम्य साहस, मजबूत इच्छाशक्ति और राष्ट्र निर्माण में दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया गया। इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने शक्ति स्थल पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की और सर्वधर्म प्रार्थना सभा में भाग लिया।
शक्ति स्थल पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा और नेताओं की पुष्पांजलि
31 अक्टूबर की सुबह नई दिल्ली स्थित यमुना तट के समीप बने 'शक्ति स्थल' पर एक गरिमामय और शांत माहौल में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन हुआ। सुबह-सुबह पूर्व प्रधानमंत्री सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद राहुल गांधी शक्ति स्थल पहुंचे। नेताओं ने समाधि पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश की पूर्व प्रधानमंत्री को मौन रखकर नमन किया।
प्रार्थना सभा में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं द्वारा पाठ और भजनों का गायन किया गया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को देशभक्ति और संवेदनाओं से सराबोर कर दिया। इसके बाद नेताओं ने 1, सफदरजंग रोड स्थित इंदिरा गांधी मेमोरियल (पूर्व प्रधानमंत्री का आवास स्थल) जाकर भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
पोते राहुल गांधी का भावुक संदेश: संस्कृत श्लोक से याद की दादी की सीख
पूर्व प्रधानमंत्री की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके पौत्र और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी दादी को याद करते हुए एक बेहद भावुक और दिल को छू लेने वाला संदेश सोशल मीडिया पर साझा किया। राहुल गांधी ने अपने बचपन की एक श्वेत-श्याम (ब्लैक एंड व्हाइट) तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वे नन्हे बालक के रूप में अपनी दादी इंदिरा गांधी की गोद में बैठे नजर आ रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा:
"आपकी गोद में बैठना, आपके दोनों हाथों को थामना, आपकी आवाज में इन शब्दों को सुनना और फिर आपके पीछे-पीछे उन्हें दोहराना...
$$\text{असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शांति, शांति, शांति।}$$
दादी, आपने मुझे कितना खूबसूरत और अनमोल उपहार दिया है, जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।"
राहुल गांधी का यह संदेश यह दर्शाता है कि इंदिरा गांधी न केवल एक कठोर और दृढ़ संकल्पी नेता थीं, बल्कि अपने परिवार और भावी पीढ़ी के लिए एक महान मार्गदर्शक और आध्यात्मिक चेतना की स्रोत भी थीं।
प्रियंका गांधी वाद्रा का संस्मरण: "अग्नि से भी अधिक तेजस्वी"
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी अपनी दादी की पुण्यतिथि पर एक अनमोल पुरानी तस्वीर साझा करते हुए उन्हें बेहद संगीतमय और काव्यात्मक अंदाज में याद किया। प्रियंका ने लिखा कि उनकी दादी का व्यक्तित्व अद्वितीय और बहुआयामी था।
प्रियंका गांधी ने अपनी भावपूर्ण पोस्ट में लिखा:
"वह कितनी सुंदर स्त्री थीं! आसमान जैसी मुक्त, समंदर जैसी गहरी, धरती जैसी सहनशील और अग्नि से भी अधिक तेजस्वी।"
प्रियंका गांधी के इन शब्दों ने यह उजागर किया कि किस प्रकार इंदिरा गांधी का जीवन हर महिला के लिए आत्मसम्मान, साहस और स्वाभिमान का प्रतीक बना हुआ है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का संदेश: "रक्त की एक-एक बूंद भारत को जीवित रखेगी"
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रसिद्ध ऐतिहासिक कथन को उद्धृत करते हुए उन्हें नमन किया। उन्होंने इंदिरा गांधी के अंतिम भाषण की उन पंक्तियों को दोहराया, जो उन्होंने अपनी शहादत से ठीक एक दिन पहले ओडिशा में कही थीं।
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने आधिकारिक संदेश में लिखा:
"जब तक मुझमें सांस है, तब तक सेवा जारी रहेगी। और जब मेरी जान जाएगी, तब मैं कह सकती हूं कि मेरे खून का एक-एक कतरा भारत को जीवित रखेगा और इसे मजबूत बनाएगा।" ~ श्रीमती इंदिरा गांधी
खरगे ने आगे लिखा कि अदम्य साहस, अटूट संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व की प्रतीक श्रीमती इंदिरा गांधी का जीवन राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए समर्पित था। उनका यह सर्वोच्च बलिदान हमारी राष्ट्रीय चेतना में हमेशा अमर रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
इंदिरा गांधी का ऐतिहासिक सफर और भारत निर्माण में भूमिका
19 नवंबर 1917 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के घर जन्मीं इंदिरा गांधी ने देश के राजनीतिक परिदृश्य को एक नई दिशा दी। वे जनवरी 1966 से मार्च 1977 तक और फिर जनवरी 1980 से 31 अक्टूबर 1984 अपनी शहादत तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं।
उनके कार्यकाल के प्रमुख ऐतिहासिक निर्णय और उपलब्धियां:
बैंकों का राष्ट्रीयकरण (1969): आम जनता और किसानों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 14 प्रमुख निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
1971 का हरित क्रांति और भारत-पाक युद्ध: 1971 के युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय और बांग्लादेश का निर्माण इंदिरा गांधी के दृढ़ नेतृत्व का परिणाम था।
परमाणु परीक्षण (पोखरण-1, 1974): 'ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्ध' के नाम से भारत ने अपना पहला शांतिपूर्ण भूमिगत परमाणु परीक्षण कर वैश्विक पटल पर अपनी वैज्ञानिक क्षमता साबित की।
अंतरिक्ष में भारत की एंट्री: उन्हीं के कार्यकाल में 1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने। जब इंदिरा जी ने पूछा कि 'अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है?', तो राकेश शर्मा ने उत्तर दिया था- "सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा।"
निष्कर्ष: एक अमर विरासत और राष्ट्रीय चेतना
31 अक्टूबर का दिन केवल एक महान नेता को खोने के शोक का दिन नहीं है, बल्कि यह देश की एकता और संप्रभुता की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले जज्बे को नमन करने का दिन है। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को पुण्यतिथि पर दी जा रही यह भावभीनी श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि भले ही वे आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद न हों, लेकिन उनके द्वारा लिए गए निर्भीक फैसले, उनकी राष्ट्रभक्ति और उनकी नीतियां आज भी आधुनिक भारत की नींव को मजबूती प्रदान कर रही हैं। 'शक्ति स्थल' से उठने वाला शांति और संकल्प का यह संदेश सदैव भारतवासियों के दिलों में गूंजता रहेगा




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